
१० किमती बातें –
१) तौहीद मुसलमानों
के लिए ईमान की जड़ हैं
२) इत्तेबाए रसुल
(सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम) में मुसलमानों की कामयाबी हैं
३) शरियत पर अमल
करना मुसलमानों के लिए अम्न हैं
४) जिहालत पर चलना
इंसान के लिए बर्बादी हैं
५) इत्तेहाद से रहना
मुसलमानों की शान हैं
६) तकवा और दीनी
इल्म से इंसान मारेफ़त तक पहोंचता हैं
७) नफसानी ख्वाहिश
इंसान को तबाह करती हैं
८) तौबा करना आदम
(अ.स.) की सुन्नत हैं
९) ज़िद पर अड़े रहना
इब्लीस का काम हैं
१०) मंजिल पर वोही
पहोंचता हैं जिस को हक की तलाश हैं
बोल/अलफ़ाज़ –
हमारी ज़बान से निकले
हुए अलफ़ाज़ हमारी शख्सियतकी अकसी करते हैं और यही अलफ़ाज़ हमें ज़मीन से बुलंदियों पर
और बुलंदियों से ज़मीन की पस्तियों में गिरा देते हैं
इसलिए सोच समझ कर
बोला करो और अगर ख़यालात की आमदनी कम हों तो लफ़्ज़ों की फुज़ुल खर्ची से बचो
जहां अपनी बात की
कदर ना हों वहाँ चुप रहना बेहतर हैं
कितने लोग ऐसे भी
हैं जो समंदर की तरह बोलते हैं मगर उनकी सोच गंदे तालाब की तरह महदूद होती हैं
इसलिए कम बोलो मगर अच्छा बोलो
लफ्ज़ लफ्ज़ मोती –
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अपने घर
की दीवार इतनी बुलंद न करो के पडोंसी की हवा रुक जाए (रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि
व सल्लम)
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सबसे
बड़ा फक्र ये हैं के तुम फक्र न करो (हजरत अली रजीअल्लाहू अन्हो)
-
अपनी
ज़रूरतें कम करोगे तो राहत हासिल होगी (हजरत इमाम शाफइ रह.)
७ बातें –
एक शख्स एक अक्लमंद
के पिच्छे सात सौ मील ७ बातें दरयाफ्त करने के लिए गया और उसने ७ बातें दरयाफ्त
की...
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आसमान
से कौन सी चीज़ ज्यादा सकील (भारी) हैं?
-
ज़मीन से
क्या चीज़ वसीह हैं?
-
पत्थर
से कौन सी चीज़ सख्त हैं?
-
कौन सी
चीज़ आग से ज्यादा जलाने वाली हैं?
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कौन सी
चीज़ ज़महरिर (निहायत सर्दी) से ज्यादा सर्द हैं?
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कौन सी
चीज़ समंदर से ज्यादा गनी हैं?
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यतीम से
ज्यादा कौन बदतर हैं?
अक्लमंद ने जवाब
दिया –
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बे
गुनाह पर बोहतान लगाना आसमानों से ज्यादा भारी हैं
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हक ज़मीन
से ज्यादा वसीह हैं
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काफिर
का दिल पत्थर से ज्यादा सख्त हैं
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हिर्स व
हसद आग से ज्यादा जलाने वाली हैं
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रिश्तेदारों
के पास हाजत लेजाना और कामयाब न होना ज़महरिर से ज्यादा सर्द हैं
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किनात
करने वाले का दिल समंदर से ज्यादा गनी हैं
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चुगलखोर
की हालत यतीम से बदतर होती हैं
हजरत अब्दुल्ला इब्ने उमर रदिअल्लाहो अन्हो फरमाते हैं छह आदमी ऐसे
हैं के क़यामत के दिन अल्लाह तआला न तो उनसे हम कलामी करेगा न तो उनके गुनाह मुआफ
करेगा बल्कि उनको सीधे जहन्नम भेज देगा
१) लवातद करने वाला
२) जानवरों से बदफैली करने वाला
३) मुश्तजनी करने वाला
४) औरत से लवातद करने वाला
५) माँ और बेटी दोनों से एक वक़्त में निकाह करने वाला
६) पडोंसी के साथ बदसलूकी करने वाला
सुफियान सौरी रह्मतुल्लाहीअलैह फरमाते हैं दस बातें ज़ुल्म हैं
१) अपने लिए दुआ करें और वालेदैन को भूल जाएँ
२) कुरान पढना जानता हो मगर पुरे दिन में सौ आयत भी न पढ़े
३) मस्जिद में दाखिल हो और दो रकअत पढ़े बगैर वापस आये
४) कब्रिस्तान से गुज़रे और कुछ न पढ़कर बक्शें
५) किसी बस्ती में आलिम मौजूद हो और लोग उससे इल्म न सीखे
६) दो शख्स एक ही रास्ते पर चले और एक दुसरे से नाम भी न पूछे
७) जुमा के रोज़ शहर में हो मगर मस्जिद में हाज़िर न हों
८) एक मुसलमान दावत दे और दूसरा मुसलमान कुबूल न करें
९) एक शख्स जवानी बेकार गुजार दे और इल्म हासिल न करें
१०) एक शख्स पेट भर कर खाना खाए और उसका पडोंसी भूखा हों
एक दाना का कौल हैं के छह बातें ऐसी हैं के जिसे जाहिल पहचाना जाता
हैं
१) गुस्से के वक़्त गजबनाक हो जाए
२) बे फायदा कलाम या गुफ्तगू करें
३) फुजूल खर्ची करें
४) हर किसी से राज़ की बात कहता फिरें
५) हर किसी पे एहतेमाद कर बैठे
६) अपने दोस्त और दुश्मन में फर्क ना कर पाए
हज्जाज बिन युसूफ ने अपने दौर के मशहूर तबिब शबिब बिन ज़ैद से फरमाइश
की के मुझे तिब्ब की कुछ अच्छी बातें बताएँ
तबीब ने कहा
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गोश्त सिर्फ जवान जानवर का खाओं
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जब दोपहर का खाना खाओं तो थोड़ी देर सो जाओ और शाम
का खाना खाकर चलो चाहें तुम्हे काँटों पर चलना पड़े
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जब तक पेट की पहली गिज़ा हज़म न करलो दूसरा खाना न
खाओं चाहे तुम्हे तीन दिन लग जाए
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जब तक बैतूलखला न जाओ, सोने के लिए बिस्तर पर न
जाओ
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फलों के नए मौसम में फल खाओं, मौसम जाने लगे तो
पल खाना छोड़ दो
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खाना खाकर पानी पीने से बेहतर ज़हर पि लो, वरना
खाना हि न खाओं
कुछ बातें गौर तलब –
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दुनिया
के अन्दर दिन नहीं बल्कि दिन के अन्दर दुनिया हैं
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गुनाह
पर तबियत खुद चलती हैं मगर नेकी पर तबियत को लाना पड़ता हैं
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आज अमल
हैं कोई हिसाब नहीं काल हिसाब होगा कोई अमल नहीं
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आज एक
आंसू का कतरा दोजख की आग के समुन्दरों को बुझा सकता हैं कल आंसू के समंदर से दोजख
की आग की एक चिंगारी भी नहीं बुझ सकती
हैं कोई ऐसा? -
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जो कोई
ईमान और ईमानदारी में बेमिसाल हों
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जो कोई
फ़तेह के बाद दुश्मन के लिए माफ़ी का ऐलान कर दें
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जो ताक़त
रखने के बावजुद भी बदला न लें
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जिसे
लहू लुहान किया जाए और वो बदले में दुआ दें
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जो
बुराई का बदला भलाई से दें
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जिसे
उसके जानी दुश्मन भी सादिक और अमिन कहें
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जो
बादशाह हों फिर भी ३-३ दिन घर चूल्हा न जलें
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जो
अपनों से ज्यादा आपका ग़म खार हों, आपकी निजात के लिए रोयें
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जो
मालिक हो कर भी ग़ुलाम को सवारी पर बैठाये और खुद पैदल चलें
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जो पाक
और मासूम हों फिर भी रात भर रोयें और अपने रब की हमदोन सना करें
(करोड़ों दरूद आप पर)
इखलाक के ३६० दर्जे हैं उनमें से अगर १ दर्जा भी किसी को मिल गया तो
वो जन्नत में जाएगा
उन ३६० दर्जात को आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने ३ जुमलों में समेत
दिया
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जो तुमसे ताल्लुक तोड़े तुम उस से ताल्लुक जोड़ों
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जो तुम्हे मुकाम ना दें, तुम उसे उसका मुकाम दो
-
जो ज़ुल्म करें उसे माफ़ कर दो
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया
-
लोगों पर एक ज़माना ऐसा आएगा उनका मकसद उनका पेट
होगा
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दौलत उनकी इज्ज़त होगी
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औरत उनका किबला होगा
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और पैसा उनका दिन होगा और वो बदतरीन लोग होगे
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया
चार चीज़ें आपको परेशान और बिमार करती हैं –
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ज्यादा बातें करना
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ज्यादा सोना
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ज्यादा खाना
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ज्यादा लोगों से मेलजोल
चार चीज़ें आपको ख़तम करती हैं
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दुनियावी फिक्र
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ग़म
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भूख
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देरसे सोना
अहादिस –
१) जो शख्स हर वक़्त बावुजू हो अल्लाह उसकी रोज़ी कुशादा करता हैं
२) अल्लाह की ख़ुशी और नाराज़गी बाप की ख़ुशी और नाराज़गी में हैं
३) अल्लाह तुम्हारी सूरतों और तुम्हारे माल को नहीं देखता, बल्कि वो
तुम्हारे दिल को और आमालों को देखता हैं
दो चीज़ें जिससे तुम अपने रब को राज़ी करो
१) कलमा तय्यबा का विर्द
२) अस्तगफार की कसरत
जो शख्स सोते वक़्त २१ बार बिस्मिल्लाह पढता हैं अल्लाह फरिश्तों से
फरमाता हैं के इस की हर सांस के बदले नेकी लिखो
दरूद पाक के फवाएद –
-
दरूद पाक पढने वाले को ना कबर में मिटटी खाएगी ना
कीड़े
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दरूद पाक जन्नत का रास्ता हैं
-
दरूद पाक की बरकत से माल बढता हैं
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दरूद पाक तंगदस्ती को दूर करता हैं
-
दरूद पाक पढनेवाले की दुआएं कुबूल होती हैं
एक आदमी आप सल्लल्लाहो अल्लैही व सल्लम के पास आया और अर्ज़ किया
-
मैं आलिम बनना चाहता हूँ, फ़रमाया तकवा इख्तियार
करलो आलिम बन जाओगे
-
मैं इज्ज़त वाला बनना चाहता हूँ, फ़रमाया लोगों की
इज्ज़त करों
-
मैं अच्छा आदमी बनना चाहता हूँ, फ़रमाया लोगों को
नफा पहुंचाओं
-
मैं ताक़तवर बनना चाहता हूँ, फ़रमाया अल्लाह पर
तवक्कुल करों
-
मैं अल्लाह का खास बनना चाहता हूँ, फ़रमाया हरम मत
खाओ
-
मैं गुनाहों में कमी चाहता हूँ, फ़रमाया अस्तगफार
करों
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया –
बेहयाई हर चीज़ को दागदार बना देती हैं और हया व शर्म उसे जीनत अता
करती हैं
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया –
“जो शख्स झूठी कसम खा कर किसी मुसलमान के हक पर कब्ज़ा करता हैं तो
अल्लाह उस पर जहन्नम को वाजिब और जन्नत को हराम कर देता हैं”
एक सहाबी ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम अगर वो
मामूली सी ही चीज़ हों?
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया – “ वो पिलु की दरख़्त की एक
शाख ही क्यों न हों”
(सहीह मुस्लिम किताबुल ईमान हदीस न. २६१)
एक काफिला एक अँधेरी गली से गुजरा उनके पांवो में कंकरियाँ चुभी कुछ
लोगों ऐ इस खयाल से के ये किसी और को भी चुभ सकती हैं नेकी के खातिर उठाकर जेबमें
रख ली कुछ ने ज्यादा कुछ ने कम
जब अँधेरे से बाहर आकर देखा तो वो हिरे थे जिन्होंने उठाया वो पछताये
के कम क्यों उठाये जिन्होंने नहीं उठाये वो भी बहोत पछताये
दुनिया की जिंदगी की मिसाल इसी अँधेरे की हैं नेकी कंकरियाँ की तरह
हैं इस जिंदगी में करदी वो आखिरत में हिरे जैसी किमती होगी और इंसान तरसेगा के
ज्यादा क्यों न की
एक दफा मुग़ल बादशाह आलमगीर ने अपने नौकर मोहम्मद हसन को हसन कह कर
बुलाया
नौकर वुज़ू का पानी लेकर आया
किसी ने पूछा तुम्हे कैसे पता के बादशाह को वुज़ू की हाजत हैं
नौकर ने कहा के बादशाह की आदत हैं के वो बगैर वुज़ू के मोहम्मद का नाम
नहीं लेता
जब बादशाह ने मुझे सिर्फ हसन कह कर पुकारा तो मैं समझ गया के बादशाह
का वुज़ू नहीं हैं और मैं वुजू का पानी ले आया
अल्लाह तआला ने जानवर को नफस दिया अक्ल नहीं दी
फरिश्तों को अक्ल दी लेकिन नफस नहीं दिया
और इंसान को अक्ल भी दी और नफस भी दिया
अब अगर इंसान अक्ल से काम लेकर नफस पे काबू पा ले तो वो फरिश्तों से
अफज़ल हैं
और अगर वो अक्ल को छोड़कर नफस का ग़ुलाम बन जाए तो वो जानवर से भी बदतर
बन जाता हैं
एक बुज़ुर्ग ने कुत्ते को कहाँ की तू हैं वफादार पर तुझमे ४ खामियां
हैं
१) तू दीवार पर पेशाब करता हैं
२) तू फकीर पर भौंकता हैं
३) तू रात में भौंकता हैं
४) तू सुबह के वक़्त छिप जाता हैं
कुत्ते ने अल्लाह से दुआ की के मुझे जुबान दे मैं बुज़ुर्ग को समझाऊँ,
अल्लाह ने दुआ कुबूल की
कुत्ते ने जवाब दिया
१) मैं ज़मीन पर इसलिए पेशाब नहीं करता क्योंकि कहीं अल्लाह का कोई
बंदा यहाँ सजदा न करें
२) फकीर पे इसलिए भौंकता हूँ के वो गैरुल्लाह से मांगता हैं
३) रात को इसलिए भौंकता हूँ के ऐ गफलत में सोने वालों उठो और अपने रब
को याद करो
४) सुबह को इसलिए भाग जाता हूँ के नमाजियों को मेरी तरफ से कोई
परेशानी न हों
हज्जाज बिन युसूफ ने एक नाबीना शख्स को खानाए काबा का गिलाफ पकडे देख
कर पूंछा, क्या कर रहे हो?
वो बोला
मैं बीस साल से अल्लाह तआला से अपनी बिनाइ की दुआ कर रहा हूँ
हज्जाज बिन युसूफ ने तआज्जुब से कहा, इतनी मुद्दत से ना तेरी दुआ
कुबूल हुई और ना तुझे इस का बदला मिला?
ऐसा हो नहीं सकता,
देखो ये तलवार हैं इसको अपने पास रखो
मैं तीन दिन के बाद आऊंगा,
अगर तेरी दुआ कुबूल ना हुई तो मैं तुझे क़त्ल कर दूंगा...!
तीन दिन बाद जब हज्जाज वापस आये तो उस नाबीना की बिनाइ वापस आ चुकी थी
हज्जाज बिन युसूफ ने कहाँ,
बीस साल की बेपरवाही की दुआ और तीन दिन की दिल से निकली दुआ में यहीं
फर्क हैं
राह चलती औरतों को
देखने से कैसे बचा जाएँ –
एक नौजवान को राह चलती लड़कियों को देखने की आदत थी
उसने अपने एक बुज़ुर्ग से अपनी परेशानी का ज़िक्र किया के वो जब भी बाहर
जाता हैं तो बाज़ार में औरतों को देखने से बाज़ नहीं आता और इस ख़राब आदत को छोड़ना
चाहता हैं, वो क्या करें की इसकी ये बुरी आदत छुट जाएँ
बुज़ुर्ग ने उसे एक दूध से लबालब भरा हुआ प्याला दिया, कहाँ के वो
बाज़ार तक होकर आए और अपने एक शागिर्द को उसके साथ कर दिया और कहाँ के जब भी प्याले
से दूध का एक भी कतराभी छलके तो इस को सरेआम मारना
नौजवान बाज़ार गया और दूध का एक कतरा गिराए बगैर वापस आ गया
बुज़ुर्ग ने नौजवान से पूछा के तुम ने बाज़ार में कितनी औरतों को देखा?
नौजवान ने जवाब दिया के मैंने किसी को नहीं देखा, मेरी साड़ी तवज्जोह
दूध के प्याले पे मरकूज़ थी और मैं डर रहा था के दूध का कतरा गिरा तो सबके सामने
मेरी पिटाई हो जायेगी
बुज़ुर्ग ने कहाँ के यही हाल सच्चे मोमिन या मुसलमान का हैं, एक सच्चा
मोमिन अल्लाह से डरता हैं और क़यामत के दिन सब के सामने शर्मिंदा होने से डरता हैं
और ये ईमान वाले कोई गुनाह करने से डरते हैं क्योंकि उनकी तवज्जोह
आखेरत में हर अमल का जवाब देने की होती हैं
अल्लाह तआला ने कुरान में इरशाद फ़रमाया के “ईमान वालों से कहों के
अपनी निगाहों को नीची रखे और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करें ताकि वो पाक रहें बेशक
अल्लाह हर चीज़ से बाखबर जो ये करते हैं (अलनूर आयत न.३०)”
अल्लाह हम सब को हराम चीज़ों की जानिब देखने से बचाएं - आमिन
लंगर लगा हुआ था और ला तादाद लोग उसके (अच्छे खाने से) मुस्तफिद हो
रहे थे
हर शख्स अपना हिस्सा लेकर आगे बढ़ जाता था
एक शख्स ने दो इंसानों का लंगर माँगा तो तकसीम करने वाले ने पूछा के
दो इंसानों के लिए क्यों मांग रहे हो?
उस ने कहा के एक अपने लिए और एक उस गरीब और मिस्कीन आदमी के लिए जो
दूर कोने में बैठा रुखी रोटी पानी के साथ खा रहा हैं
लंगर तकसीम करने वाले ने कहा जो ये लंगर सब खा रहे हैं वो उस शख्स की
जानिब से से तकसीम किया जा रहा हैं और वो हमारे खलीफा हजरत अबू बकर सिद्दीक
रज़िअल्लाहू अन्हो हैं....
खलीफा हजरत उमर फारुख रज़िअल्लाहू अन्हो का खौफ –
खलीफा हजरत उमर फारुख रज़िअल्लाहू अन्हो की बीवी कहती हैं के हजरत उमर
फारुख रज़िअल्लाहू अन्हो बिस्तर पर सोने के लिए लेटते तो नींद ही उड़ जाती थी, बैठ
कर रोना शुरू कर देते थे.
मैं पुच्छती थी – ऐ अमीरुल मोमिनीन, क्या हुआ?
वो कहते थे – ‘मुझे मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम की उम्मत की
खिलाफत मिली हुई हैं, और उन में मिस्कीं भी हैं, ज़इफ भी हैं, यतीम भी हैं, और
मजलूम भी हैं. मुझे डर लगता हैं के अल्लाह तआला मुझ से उन सब के बारे में सवाल
करेगा, मुझ से जो कोताही हुई तो मैं अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो अलैहि व
सल्लम को क्या जवाब दूंगा?’
सय्यदना उमर फारुख रज़िअल्लाहू अन्हो कहते थे – ‘अल्लाह की कसम! अगर
दजला के दूर दराज़ इलाके में भी किसी खच्चर को राह चलते हुए ठोकर लगे तो मुझे डर
लगता हैं कहीं अल्लाह तआला मुझ से ये सवाल न करदें, ऐ उमर! तूने वो रास्ता ठीक
क्यों नहीं कराया था?’
माँ की अजमत और अदब –
हजरत इमाम हसन रज़िअल्लाहू अन्हो ने अपनी वालिदा हजरत फातिमा
रज़िअल्लाहू अन्हा के साथ खाना खाना छोड़ दिया
माँ ने इस बात को महसूस किया, एक रोज़ फरमाने लगी – हसन (रज़िअल्लाहू
अन्हो) मेरा दिल कहता हैं के तुम मेरे साथ खाना खाओ पर तुम मेरे साथ खाते नहीं हो?
वजह क्या हैं?
आपने अर्ज़ किया – माँजी और कोई वजह नहीं हैं, बस डर लगता हैं कहीं आप
से पहले लुकमा न उठा लूं और बे अदबों में शामिल न हो जाऊं
खुदा की बंदगी –
किसी बादशाह का ग़ुलाम बहोत दीनदार और अक्लमंद था
अचानक नौकरी छोड़कर इबादत में मशगुल हो गया
एक दिन बादशाह उसके पास गया और पूछने लगा के तुमने नौकरी क्यों छोड़ी?
ग़ुलाम ने कहाँ के –‘पांच बातों की वजह से मैंने शाही नौकरी छोड़ दी’
बादशाह ने पूछा के –‘वो पांच असबाब कौन से हैं?’
ग़ुलाम ने कहाँ वो पांच असबाब ये हैं –
-
एक तो ये के आप बैठे रहते हैं और मैं आपकी खिदमत
में खड़ा रहता हूँ, अब खुदा तआला की बंदगी करता हूँ तो भी नमाज़ में बैठने का हुक्म
हैं
-
दूसरी वजह ये हैं के आप तो बैठे खाते रहते हैं और
मैं खड़ा आप को देखता रहता हूँ, मगर ऐसा रज्जाक मिल गया हैं, मुझको खिलाता हैं और
खुद खाने से पाक हैं
-
तिसरी वजह ये हैं के आप सोते रहते हैं और मैं
पहरा दिया करता था, अब मैं ऐसे बादशाह की गुलामी में हूँ की के मैं खुद सोता रहता
हूँ और वो मेरी निगहबानी करता हैं
-
चौथी वजह ये हैं के मैं डरता रहता था के अगर आप
मर गए तो आप के दुश्मन मुझे तकलीफ देंगे, अब ऐसी हस्ती के खिदमत में हूँ जो हमेशा
कायम था, हैं और रहेगा, इसलिए मुझे किसी का खौफ नहीं
-
पांचवी वजह ये हैं के मैं डरता रहता था के मुझ से
कोई गलती हो गयी तो आप नहीं बख्शेंगे, अब मालिक ऐसा रहम दिल हैं के दिन में सौ
मरतबा भी गुनाह करूँ तो वो तौबा करने से बख्श देता हैं
हकीकी मुहब्बत –
-
दिल चाहता हैं महबूब को अपना बना ले, ये हैं
इकरारे मुहब्बत यानी – कलमा
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दिल चाहता हैं महबूब से बातें करें, ये हैं –
नमाज़
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दिल चाहता हैं महबूब के लिए खाना पिना छोड़ दें,
ये हैं – रोज़ा
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दिल चाहता हैं महबूब के लिए माल खर्च करें, ये
हैं – ज़कात
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दिल चाहता हैं महबूब के घर के चक्कर लगायें, ये
हैं – हज
-
दिल चाहता हैं महबूब पर जान लड़ा दें, ये हैं –
जिहाद




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