Skip to main content

Deen - E - Islam GK

Below are few points pertaining to Deen - E - Islam general knowledge which may enlighten the spirit. Loving names of Prophet Muhammad Sallallahu Alaihi Wa Sallam- 1. in Quran – Muhammad and Ahmed 2. in Zaboor – Aaqib 3. in Toraat – Maaz 4. in Bible – Farqeelat 5. in Heaven – Abdul Kareem 6. in Sky – Mujtaba 7. in Earth – Moazzam 8. Ambiya called him as – Abdul Wahab 9. Malaika called him as – Abdul Hameed 10. ALLAH AJJ-WA-JAL called him as – Yaseen - Sallallahu alaihi wa sallam 1 0 names of ASHRA-E-MUBASSHIRA COMPANIONS OF RASOOLULLAH SALLALLAHU ALAIHI WA SALLAM 1. Hazrat Abu Baqr Siddique Radiallahu Anhu 2. Hazrat Umar Bin Khattab Radiallahu Anhu 3. Hazrat Usmane Gani Radiallahu Anhu 4. Hazrat Ali Radiallahu Anhu 5. Hazrat Talha Radiallahu Anhu 6. Hazrat Zubair Radiallahu Anhu 7. Hazrat Abdul Rahman Bin Aauf Radiallahu Anhu 8. Hazrat Saad Bin Abi Waqqas Radiallahu Anhu 9. Hazrat Saed Bin Zaid Radiallahu Anhu 10. Hazrat Abu Ubaida Bin Jarrah...

नमाज़


आयते कुरानी नमाज़ के बारे में

“और नमाज़ कायम करें मेरी याद के लिए” (सुरह ताहा १४)
“बेशक नमाज़ बेहयाइ और बुरी बातों से रोकती हैं “ (सुरह अल – अनकबूत ४५)
“यकीनन वो मोमिन फला पा गए जो अपनी नमाजों में ख़ुशु और खुजू इख़्तियार करते हैं” (सुरह अल – मोमिनून १,२)
“और वो जो अपनी नमाज़ों की हिफाज़त करते हैं यही लोग जन्नत में इज्ज़त पाएगे” (सुरह अल – मारिज ३४,३५)
“और अल्लाह ने फ़रमाया के बेशक मैं तुम्हारे साथ हूँ अगर तुम नमाज़ काइम करोगे” (सुरह अल – माइदा १२)
“और सब्र और नमाज़ से मदद हासिल करें” (सुरह अल – बकरा ४५)
“और तुम तकवा इख़्तियार करो और नमाज़ कायम करो और तुम शिर्क करने वालो में से ना हो” (सुरह अल – रूम ३१)
यहाँ एक बात नोट करने वाली हैं –
नमाज़ सुस्ती और काहिली और मसरूफीयात रोकती हैं
अगर कोई शख्स अल्लाह जल्ल शाअनहू के हुकुम को छोड कर सुस्ती और काहिली और शैतान का हुकुम मानता हैं तो वो भी शिर्क हो जाएगा
“नमाजों की हिसज़त करें और खुसूसन दरमियान की नमाज़ पूरी पाबन्दी के साथ अदा करते रहो और अल्लाह के सामने अदब से खड़े रहो” (सुरह अल – बकरा २३८)
“और नमाज़ कायम करो और ज़कात दिया करो और अल्लाह रुकू करने वालों के साथ” (सुरह अल – बकरा ४३)

“पस इन नमाजियों के लिए खराबी हैं जो नमाज़ों से गाफिल हैं” (सुरह अल – माउन ४,५)



नमाज़ की फ़ज़ीलत अहादिस की रौशनी में

-    नमाज़ में शिफा हैं
-    नमाज़ दिल का नूर हैं
-    नमाज़ आँखों की ठंडक हैं
-    नमाज़ लाजिम हैं क्यूंकि ये अफज़ल जिहाद हैं और गुनाहों को तर्क कर देना अफज़ल हिजरत हैं
-    नमाज़ हर मुत्तकी के लिए अल्लाह जल्ल शाअनहू से कुर्ब का जरिया हैं
-    नमाज़ मोमिन की मेराज हैं
-    नमाज़ से गुनाह ऐसे झडतें हैं जैसे खिज़ा में खुश्क पत्ते दरख़्तसे झडतें हैं
-    आदमी और शिर्क के दरमियान नमाज़ ही हाइल हैं
-    अल्लाह जल्ल शाअनहू ने कोई चीज़ ईमान और नमाज़ से अफज़ल फ़र्ज़ नहीं की
-    नमाज़ अदा करने से शैतान का चेहरा सियाह हो जाता हैं
-    नमाज़ जन्नत की कुंजी हैं
-    हमारे और काफिरों के दरमियान जो वाकइ फर्क हैं वो नमाज़ पड़ने और ना पड़ने का हैं, बस जिसने नमाज़ छोड़ दी इसने कुफ्र का काम किया
आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम को जब कोई सख्त अम्र पेश आता तो आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम नमाज़ की तरफ फ़ौरन मुतवज्जा होते थे
नमाज़ फ़र्ज़ की गई हैं और इसका पढना लाजिम हैं
अल्लाह जल्ल शाअनहू हमें नमाज़ पढने की तौफीक अता फरमाए आमीन !










Comments

Popular posts from this blog

सच बोलना ....

सादिक – सच बोलने वाले को कहते हैं सिद्दीक – सच की तस्दीक (कुबूल) करने वाला दीने इस्लाम सच का दीन हैं, अल्लाह के रसूल सादिके अमीन हैं हदीसे मुबारका – मोमिन सब कुछ हो सकता हैं झूठा नहीं हो सकता सच एक बुनियाद हैं दीन-ए-इस्लाम की जो बात भी सच करे और अमल भी सच करे वो शख्स सिद्दीक होता हैं सच्चा वो होता हैं जिसका दिल बातें करे अमल के ज़रिये हुकूक की अदायगी करने वाला सिद्दीक होता हैं आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया तुम मुझे चंद चीजों की ज़मानत दे दो, मैं तुम्हे जन्नत की ज़मानत देता हूँ -    जब बात करो तो सच्ची बात करो -    वादा करो तो उसको पूरा करो -    और जब तुम्हे अमानत मिले तो उसे अमानतदारी से अदा करो -    अपने इज्ज़तो नामूस शर्मगाह की हिफाज़त करो -    अपनी आँखों को नीचा रखो, बंद रखो, ना महरम से -    अपने हाथों से दूसरों को नुकसान न दो आप सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया ३ बातें ऐसी हैं जो ३ बातें तुम में हो, तुम्हारा जो भी नुकसान हो जाये तुम्हे उसका फर्क नहीं पड़ता -   ...

Deen - E - Islam Basic facts

"Deen" is an Arabic word with three general senses Judgement, custom and religion. In Islam the word " Deen - E-Islam " refers  to the way of life. Muslims must adopt to comply with divine law, encompassing beliefs, character and deeds. The term " Deen" appears in the  Qur'an 98 times with different connotations, including the phrase "Yawm al Deen", generally translated as Day of Judgement. Below are very basic facts about  " Deen - E-Islam "   1) "Islam" - means "surrender" or "submission". "Salam" (which means "peace") is the root word of "Islam". In a religious context the word "Islam" means "the surrendering of one's will (without compulsion) to the true will of God in an effort to achieve peace". 2) "Muslim" - means "anyone or anything that surrenders itself to the true will of God". 3)  " Deen - E-Islam "    is...